Sunday, March 15, 2026

20 दिन में एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत… बची सिर्फ बहू, जिसे समझ रहे थे अनहोनी, उसका सच जान उड़ गए होश

by Desk
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तारीख 20 सितंबर 2023, सुबह का वक्त और जगह महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले का महागाओ गांव। एक घर में रहने वाले बुजुर्ग पति-पत्नी की अचानक तबीयत बिगड़ी और इन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया जाता है। दोनों को शरीर के सभी अंगों में झुनझुनी, कमर के निचले हिस्से में तेज दर्द, सिरदर्द, काले पड़ चुके होंठ और जीभ में भारीपन की शिकायत थी। पति-पत्नी को एक के बाद एक, तीन हॉस्पिटल में ले जाया गया, लेकिन जब तक डॉक्टर बीमारी को पकड़ पाते, दोनों की दर्दनाक मौत हो गई।

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माता-पिता की अचानक हुई मौत से परिवार सदमे में था। लेकिन, आंसू सूख पाते, इससे पहले ही परिवार के तीन और सदस्यों के अंदर ऐसे ही लक्षण दिखाई दिए। इन्हें भी हॉस्पिटल ले जाया जाता है, पर किसी की जान नहीं बच पाती। महज 20 दिनों के भीतर, एक ही परिवार के पांच लोगों की रहस्यमय तरीके से हुई मौत से गांव के लोगों के दिलों में दहशत बैठ जाती है।मामले की खबर पुलिस तक पहुंचती है। केस की तफ्तीश में पता चलता है कि इन 5 लोगों की मौत के बाद परिवार में केवल एक महिला जिंदा बची है। पुलिस का माथा ठनक जाता है। इस आखिरी जिंदा बची महिला से पूछताछ होती है और फिर सामने आती है, पांच लोगों की मौत के पीछे की एक ऐसी कहानी, जिसे सुनकर शायद आपका भी कलेजा कांप जाए।

गढ़चिरौली के जिस परिवार के अंदर महज 20 दिनों में पांच मौतें हुई, वो परिवार था शंकर कुंभारे नाम के शख्स का। शंकर, उनकी पत्नी विजया, बेटा रोशन, बेटी कोमल और पत्नी की बहन उषा दुनिया से जा चुके थे। परिवार में जिंदा बची थी केवल शंकर के बेटे रोशन की पत्नी संघमित्रा कुंभारे। परिवार के इन सभी लोगों की जान संघमित्रा ने ही खाने में जहर देकर ली थी।

कैसे शुरू हुई पांच कत्ल की कहानी

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हत्याकांड से एक साल पहले दिसंबर 2022 में शंकर के बेटे रोशन ने अकोला की रहने वाली संघमित्रा से लव मैरिज की थी। संघमित्रा कृषि वैज्ञानिक के पद पर थी। उसके माता-पिता इस रिश्ते के खिलाफ थे, इसलिए उसने घर से भागकर शादी की और गढ़चिरौली में रोशन के पूरे परिवार के साथ रहने लगी। कुछ दिन सबकुछ ठीक रहा, लेकिन अचानक हालात बदलने लगे।रोशन अक्सर संघमित्रा के साथ मारपीट करता। वहीं, सास-ससुर और ननद कोमल का बर्ताव भी उसके साथ बहुत खराब था। तीनों अक्सर उसे ताना मारते थे। संघमित्रा के पिता को जब पता चला कि उनकी बेटी ससुराल में परेशान है, तो बहुत दुखी हुए और अप्रैल 2023 में खुद अपनी जान ले ली। अगस्त में रक्षाबंधन के दिन संघमित्रा अपने घर जाना चाहती थी, लेकिन पति ने मना कर दिया।

बस चले तो सबकी जान ले लूं…

इस बात को लेकर घर में काफी झगड़ा हुआ और रोशन ने एक बार फिर संघमित्रा के साथ मारपीट की। पड़ोस में रोशन की सगी मामी रोजा रामटेके का भी घर था। एक दिन जब संघमित्रा किसी काम से घर से बाहर निकली तो रोजा ने उसे रोक लिया और दिलासा देते हुए, कुछ दिन पहले उसके घर में हुए झगड़े की वजह पूछी। मामी का सहारा मिलते ही संघमित्रा टूट गई और बताया कि वो इस घर में नरक की जिंदगी जी रही है.संघमित्रा को अपनी मामी में इतना अपनापन दिखा कि उसने गुस्से में रोजा से कह दिया, ‘मेरा बस चले तो ससुराल के सारे लोगों को मार डालूं’। रोजा की एक अलग कहानी थी। प्रॉपर्टी के बंटवारे को लेकर रोजा और संघमित्रा की सास विजया का लंबे वक्त से विवाद चल रहा था। दरअसल, विजया की तीन बहनें और एक भाई था। रोजा इसी भाई की पत्नी थी और पड़ोस में ही रहती थी।

रोजा हड़पना चाहती थी प्रॉपर्टी

विजया के पिता के पास 4 एकड़ जमीन थी और वो चाहती थी कि प्रॉपर्टी का बंटवारा पांचों भाई-बहनों में बराबर-बराबर हो। जबकि, रोजा इसके खिलाफ थी। उसका कहना था कि सारी प्रॉपर्टी परिवार के बेटे यानी उसके पति को मिले। जब उसने संघमित्रा को विजया के परिवार के खिलाफ देखा, तो मौके का फायदा उठाने के लिए एक प्लान बनाया। वो हर दिन संघमित्रा को उसके ससुराल के खिलाफ भड़काने लगी।ससुराल से तंग संघमित्रा ने एक बार अपनी जान देने की भी कोशिश की, लेकिन रोजा ने उससे कहा कि खुद को सजा देने के बजाय, इन लोगों को खत्म करे। रोजा ने इस काम में उसकी मदद करने का भी भरोसा दिया। अब संघमित्रा और रोजा ने कत्ल करने के तरीके खोजने के लिए इंटरनेट पर सर्च करना शुरू कर दिया। सबसे पहले संघमित्रा ने धतूरा मंगवाया, लेकिन इसे पानी या खाने में मिलाने से उसका रंग हरा हो जाता था, इसलिए उसने ये आइडिया छोड़ दिया।

थैलियम देकर सुला दिया मौत की नींद

इसके बाद संघमित्रा को थैलियम के बारे में पता चला, जिससे इंसान की मौत तड़प-तड़पकर होती है। उसने रोजा को अपने आइडिया के बारे में बताया और एक दिन पड़ोस के राज्य तेलंगाना से थैलियम मंगा लिया। सबसे पहले उसने नॉनवेज खाने में थैलियम मिलाकर अपने सास-ससुर को खिलाया। 20 सिंतबर को दोनों की तबीयत बिगड़ी। इसके बाद 26 सितंबर को शंकर और 27 सितंबर को उनकी पत्नी विजया ने दम तोड़ दिया।इसके बाद बारी थी रोशन और कोमल की। अपने पति को संघमित्रा ने दाल के अंदर थैलियम मिलाकर दिया, जबकि कोमल को दूसरे खाने में मिलाकर। विजया की तीनों बहनों में से एक थी उषा। इसे खाने में थैलियम मिलाकर संघमित्रा की मामी रोजा ने खिलाया। 8, 14 और 15 अक्टूबर को इन तीनों की भी मौत हो गई। सबकुछ संघमित्रा और रोजा के प्लान के मुताबिक चल रहा था, लेकिन फिर मामले में नया मोड़ आया।

कैसे खुला कत्ल का राज

दरअसल, जिस हॉस्पिटल में इन पांचों की मौत हुई, उसके मेडिकल ऑफिसर को कुछ शक हुआ। शक था पांचों को जहर दिए जाने का। इस मेडिकल ऑफिसर ने मामले की खबर गढ़चिरौली पुलिस को दी और संघमित्रा को हिरासत में ले लिया गया। शुरुआत में संघमित्रा ने इस हत्याकांड में अपना हाथ होने से इनकार किया, लेकिन सख्ती करने पर वो टूट गई।संगीता ने अपना गुनाह कबूल कर लिया और साथ ही रोजा के बारे में भी पुलिस को बता दिया। पुलिस के मुताबिक, संघमित्रा और रोजा ने परिवार के ड्राइवर सहित तीन अन्य लोगों को भी खाने में थैलियम मिलाकर दिया था। किस्मत से ये तीनों बच गए। पुलिस ने संघमित्रा और रोजा के ऊपर संबंधित धारों में केस दर्ज कर दोनों को जेल भेज दिया।

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